पत्ता गोभी की सब्जी (राजस्थानी स्टाइल) – Patta Gobhi / Cabbage ki Sabzi (Rajasthani Style)
पत्ता गोभी की सब्जी (राजस्थानी स्टाइल) – Patta Gobhi / Cabbage ki Sabzi (Rajasthani Style)
पत्ता गोभी की सब्जी (राजस्थानी स्टाइल) – Patta Gobhi / Cabbage ki Sabzi (Rajasthani Style)
स्नेहा/नव्या, आजकल बाजार में अचारी लाल मिर्च बहुत मिल रही है। आज मैं तुम्हे अचारी लाल मिर्च की बड़ी आसानी से बनने वाली एक अलग […]
स्नेहा/नव्या आज मैं तुम्हे हल्दी का अचार किस प्रकार से बनता है सीखाने जा रही हूँ। आज कल बाजार में कच्ची हल्दी बहुतयात में मिल […]
स्नेहा/नव्या आज में तुम्हे हमारे राजस्थान में बनाये जाने वाली ग्वार ढोकली की विधि बताने जा रही हूँ जो बहुत ही स्वादिष्ट होती है। सामग्री […]
स्नेहा/नव्या मैं आज तुम्हे कांजी वड़ा कैसे बनाते हैं सिखाने जा रही हूँ। यह बनाने में बहुत ही आसान और खाने में बहुत स्वादिष्ट होते […]
स्नेहा/नव्या राजस्थान में कई प्रकार की कढ़ी बनाई जाती है जैसे प्याज की कढ़ी, पालक की कढ़ी, चने की दाल की कढ़ी, बथुए की कढ़ी, […]
स्नेहा / नव्या आज मैं तुम्हे रतालू / जमीकंद की सब्जी कैसे बनाई जाती है सिखाने जा रही हूँ। यह जमीन में पैदा होने वाला कन्द […]
स्नेहा/नव्या आज में तुम्हे मंगोड़ी/वड़ीयों की सब्जी कैसे बनाते हैं सिखाने जा रही हूँ। गट्टे की तरह मंगोड़ी की सब्जी भी राजस्थान में घर घर में बनाई जाती है। राजस्थान में मंगोड़ी बनाने के लिए, मूंग की दाल को तीन चार घंटे के लिए भिगोने के बाद उसे मिक्सी में पीस कर उसमे मसाले डाल कर धूप में छोटे छोटे आकार में तोड़ कर सुखा लिया जाता है इसी को मंगोड़ी के नाम से जाना जाता है। इन सूखी हुई मंगोड़ी/वड़ीयों को सब्जी बनाने के लिए आप पूरे साल काम में ले सकते हैं। आजकल इसके पेकेट भी बाज़ार में मिल जाते हैं। आम किराने की दूकान हो या सुपर स्टोर, मंगोड़ी/वड़ीयां आपको पापड वाले सेक्शन में आराम से मिल जायेगी।[…]
स्नेहा आज मैंने तुहारी पसंद की ग्वारफली की सब्जी बनायी है, वैसे तो यह तरी वाली और सूखी दोनों तरह बनती है मगर तुम्हे चूंकि फरकी (सूखी) ग्वारफली पसंद है इसीलिए मैंने आज विशेषकर बनायी है। हालांकि अभी इसका सीजन नही है पर आज मार्केट में मुझे दिखी तो मैंने तुरंत खरीद ली क्योंकि मुझे पता है कि तुम्हे यह सब्जी कितनी पसंद है।[…]
स्नेहा नव्या आज मैं तुम्हें मक्का भुट्टे की सब्जी कैसे बनती है सीखाने जा रही हूँ जिसे तुम्हारी नानीसा बहुत अच्छा बनाती थी। उन्होंने अपने ससुराल यानी मेरे पैतृक गाँव में सीखी थी।[…]
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